कहाँ से चले थे, किधर जा रहे हैं..
किस बात का रोष है,
जो खो गया क्या वही कल का जोश है?
क्यों सो गयी है सोच?
क्यों पुत गयी है अमावस की कालिख इस पर ?
सूखी रेत को कीचड़ का ढेर समझते थे
आज कदमो-निशां खामोश हैं....
किस बात का रोष है,
जो खो गया क्या वही कल का जोश है?
क्यों सो गयी है सोच?
क्यों पुत गयी है अमावस की कालिख इस पर ?
सूखी रेत को कीचड़ का ढेर समझते थे
आज कदमो-निशां खामोश हैं....
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